अंधविश्वास
अंधविश्वास

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एक बात तो समझ आती है। कि लोंगो पर विश्वास नही किया जा सकता है कई हज़ारो वर्षो से चली आ रही परम्पराओं के कारण हिंदू धर्म मे विश्वास-अंधविश्वास बन गया है। किसी भी विश्वास को अंधभक्त बनकर माने चले जाते हैं ऐसी बहुत सी परम्परा है।जैसे- (पशु बलि प्रथा,जादू-टोना, तंत्र-मंत्र,सती प्रथा,छुआछूत,मूर्ति पूजाकर्मकांड और संस्कार,आदि।)संसार का सबसे बड़ा अंधविश्वास है की निराकार किसी साकार रूप में मिलेगा | इन परम्पराओ के करण मानव प्रजाति अंधविश्वास जेसी भयंकर बीमारी का शिकार हो बैठी है। एक ऐसी परम्परा जो कि पीढ़ियों से चली आ रही है और इन परम्पराओ में लोगऔर भी ज्यादा अंधे होते जा रहे है
पशु बलि प्रथा

पशु बलि एक अंधविश्वास परम्परा है। एक निर्जीव बिनबोले जानवर की बली देना किसी भी शास्त्र में नही लिखा है हिंदूधर्म पर सबसे बड़ा कलंक है।देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बलि का प्रयोग किया जाता है। बलि प्रथा के अंतर्गत
बकरा, मुर्गा या भैंसे की बलि दिए जाने का प्रचलन है।
छुआछूत
अक्सर जातिवाद, छुआछूत और सवर्ण, दलित वर्ग के मुद्दे को लेकर धर्मशास्त्रों को भी दोषी ठहराया जाता है, छुआछूत कई हजारों वर्षो से चली आ रही ब्राह्मणो की गठिया सोच की वज़ह से आज दलितों को ओर निर्धन ग़रीब लोंगो को काफी सारी परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है।
विश्वास
गुरु शब्द में बहुत सारी आशा और सकारात्मकता है, ऐसा कहा भी जाता है कि जिसके सिर पर उसके गुरु का हाथ है उसको भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है | गुरु होने पर व्यक्ति को लगता है कि उसके सिर पर ऐसी छत्रछाया है जिसके कारण वह सभी प्रकार की समस्याओं और अनहोनियों से सुरक्षित है,
आओ हम सब मिलकर इस अंधविश्वास को मिटाए
ओर एक आध्यात्मिक राह पर चलने का वचन लेते है
ऐसा इस पुस्तक में क्या है ?
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